Gurjar pratihar Mihir bhoja

गुर्जर  सम्राट मिहिर भोज  प्रतिहारगुर्जर प्रतिहार राजवंश के सबसे महान राजा माने जाते हैं। इन्होने लगभग ५० वर्ष तक राज्य किया था। मिहिरभोज प्रतिहार विष्णु  भगवान के भक्त थे तथा कुछ सिक्कों मे इन्हे 'आदिवराह' भी माना गया है। गुर्जर  प्रतिहार  राजवंश  गुर्जर  या ग़ुज्जर  कही जाने  वाली जाती से सम्बन्ध  रखता  है ! आज भी प्रतिहार  गोत्र  गुर्जरो मे बड़ी मात्रा मे मिलता है, ध्यान  रखे की प्रतिहार  और परिहार  दोनों आज के समय के  अलग गोत्र  है जहाँ प्रतिहार  गुर्जर  जाती का गोत्र है वही परिहार राजपुत  जाती का है! 
 प्रतिहार  एक द्वारपाल  की उपाधि  है जो गुर्जरो  के लिए प्रयोग की गयी है क्योंकि इस प्रतिहार  गुर्जर  वंश  ने 400 सालो  तक अरब शाषको  को भारत या उस समय  का   कहे  जाने वाला गुर्जरदेश  की सीमा  से कोसो  दूर तक खदेडे  रखा ! हिन्दुओ  के ग्रन्थ  स्कंदपुराण  के प्रभासखंड  मे इन्हे क्षत्रियो  की संज्ञा दी गयी है, भागवत गीता  रिग वेद जैसे  अनेक  ग्रंथो मे क्षत्रिय धर्म  के लिए लड़ने वाले इंसानों  को कहा गया है ना की किसी जाती को, क्षत्रिय  कोई जाती नहीं है क्षत्रिय  कर्म  से बनते है, आज के समय मे बहुत सी जातीय खुद को क्षत्रिय  बताती  है परन्तु  हिन्दू धर्म के ग्रंथो  के अनुसार क्षत्रिय  जाती नहीं एक वर्ग है जो कर्म  के अनुसार  बनता है ! कुछ इतिहासकार  इसी क्षत्रिय  संज्ञा  के कारण गुर्जर  प्रतिहार  ही नहीं अनेक वंशो  को राजपुत बताते  है ! लेकिन  यह कहना भी गलत नहीं होगा क्युकी राजपुत  कोई जाती  नहीं थी, आधुनिक  भारत मे आते आते यह एक जाती बन गयी, परन्तु  मध्यकाल और वैदिक  समय  मे राजपुत  राजा के पुत्रो  के लिए उपयोग किया  जाता था ! इसी कारण भंडारकर, ओझा, बैजनाथ पूरी जैसे  महान इतिहासकार राजपुत  जाती की उत्पत्ती  मिश्रित  वर्ग से मानते  है उनका मानना  है की राजपुत  जाती  गुर्जर,  शक,  खश, कोल,  किन्नर, किरात, आर्य  जैसे  समूह  से निकली  है !


 मिहिरभोज प्रतिहार के साम्राज्य का विस्तार आज के मुलतान से पश्चिम बंगाल तक और कश्मीर से कर्नाटक तक फैला हुआ था। ये धर्म रक्षक सम्राट शिव के परम भक्त थे। 50 वर्ष तक राज्य करने के पश्चात वे अपने बेटे महेंद्रपाल को राज सिंहासन सौंपकर सन्यासवृति के लिए वन में चले गए थे। अरब यात्री सुलेमान ने भारत भ्रमण के दौरान लिखी पुस्तक सिलसिलीउत तुआरीख 851 ईस्वीं में सम्राट मिहिरभोज को इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताया है, साथ ही मिहिरभोज प्रतिहार की महान सेना की तारीफ भी की है, साथ ही मिहिरभोज के राज्य की सीमाएं दक्षिण में राजकूटों के राज्य, पूर्व में बंगाल के पाल शासक और पश्चिम में मुलतान के शासकों की सीमाओं को छूती हुई बतायी है! 
गुर्जर  सम्राट  मिहिर  भोज  की मूर्ति प्रतिमा एवं मार्ग  बहुत जगह देखे जा सकते है,  पंडित दीनदयाल  ASI नॉएडा  मे प्रधानमंत्री  नरेन्द्र  मोदी ने भी  गुर्जर  इतिहास का दर्शन किया जाहा साफ साफ मिहिरभोज  जी को गुर्जर जाती का बताया गया है !उत्तराखंड  राज्य  के रूडकी  शहर  मे भी गुर्जर  सम्राट  मिहिरभोज  की प्रतिमा  लगी है,  दिल्ली NH-24 का नाम भी गुर्जर सम्राट मिहिरभोज  के नाम पर रखा  गया है,  हरयाणा  के  करनाल, कैंथल,  यमुनानगर, के साथ  साथ साथ दिल्ली, मध्य  प्रदेश  के क्षेत्रो  मे भी जो भी प्रतिमा  सरकार  द्वारा लगाई है उनपर  गुर्जर  सम्राट मिहिरभोज  लिखा है 

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